Monday, June 19, 2017

कौन है वो लोग जो आप की देशभक्ति को सिर्फ क्रिकेट तक सीमित रखना चाहते हैं? और क्यो ?

आज कुछ लोग देश भक्ति का मतलब सिर्फ क्रिकेट में पाकिस्तान से बाजी जीतने तक सीमित करना चाहते हैं  !!

 एक ऐसा भ्रम फैलाया जा रहा है कि क्रिकेट में अपनी टीम को सपोर्ट करने से ही हमारी देशभक्ति साबित हो जाती है ! और उसके साथ देश पर प्यार जताने का हमारा फर्ज भी पूरा हो जाता है!!

इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि भारतीय क्रिकेट टीम को हर भारतीय प्यार करता है और उसे सपोर्ट करता है

लेकिन जब आपकी देशभक्ति को सिर्फ क्रिकेट जैसी छोटी सी चीज पर केंद्रित कर दिया जाता है तो आप जीवन के और देशभक्ति के असली सवाल पूछना भूल जाते हैं

इसलिए TV पर और मीडिया में क्रिकेट को देशभक्ति से जोड़कर एक जहरीला घोल तैयार किया गया है

देश को यह घोल पिलाकर अंधा बनाने का काम किया जा रहा है

अगर आप क्रिकेट को ही देशभक्ति समझने लगे तो
आप कालेधन पर सवाल नहीं उठाएंगे
बढ़ती हुई बेरोजगारी पर सवाल नहीं उठाएंगे
बढ़ती हुई कौमी है विसंवादिता पर सवाल नहीं उठाएंगे
गिरती हुई जीडीपी ग्रोथ रेट पर सवाल नहीं उठाएंगे
अमीर और गरीब के बीच बढ़ रही खाई पर सवाल नहीं उठाएंगे
कॉरपोरेट की हजारों करोड़ की लोन माफी पर सवाल नहीं उठाएंगे
किसानो की हो रही आत्महत्याएं और किसानों को नहीं मिल रहे फसलों के दाम पर सवाल नहीं उठाएंगे
सरहद पर मारे जा रहे जवान और जवानों को नहीं दिए जा रहे वन रैंक वन पेंशन पर सवाल नहीं उठाएंगे

एक असली देशभक्त इन सब सवालों को लेकर सामने आएगा क्योंकि उसे क्रिकेट के अलावा देश की और भाइयों बहनों की जीवन की ज्यादा चिंता है

इसलिए सत्ता वाले और उनका खरीदा मीडिया आपकी देश भक्ति को सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट में और पाकिस्तान को धिक्कारने में कैद करना चाहते हैं

ताकि आप असली सवाल न पूछे और फर्जी राष्ट्रभक्ति के नशे में चूर रहे

Thursday, May 25, 2017

भारतीय इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की हैकिंग का पूरा सच

कैसे हो सकता है ईवीएम हैक?



भारतीय चुनाव आयोग एटीएम हैक हो सकता है इस बात को सिरे से खारिज करता है लेकिन हम आपको आज ईवीएम को हैक करने के वो सारे रास्ते दिखाएंगे जो कि कोई भी हैकर अपने काम को अंजाम देने में ले सकता है

ईवीएम जी हैकिंग समझने के लिए यह समझना जरुरी है कि ईवीएम कैसे बनती है और कहां से कहां तक घूमती है

भारतीय इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन वैसे तो भारत में बनती है लेकिन उसकी मेमोरी चिप जापान से और अमेरिका से आती है (गौरतलब है कि इन दोनों देशों में ईवीएम का प्रयोग चुनाव के लिए नहीं होता)

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का सॉफ्टवेयर भारत में बनता है लेकिन उसकी चीप पर राइटिंग विदेश में होती है

1 हार्डवेयर टेंपरिंग

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के हार्डवेयर से छेड़छाड़ करके उसको हैक किया जा सकता है

चुनाव आयोग का कहना है कि मशीन का हार्डवेयर कभी हैक नहीं किया जा सकता क्योंकि इसके लिए मशीन को खोलना पड़ता है

लेकिन यह साबित हो चुका है कि एक वोटिंग मशीन को खोल कर टेंपर करके वापस बंद करने में सिर्फ 90 सेकंड लगते हैं

हार्डवेयर टेंपरिंग करने के लिए
मशीन का डिस्प्ले बदला जा सकता है
मशीन में एक्स्ट्रा चिप लगाई जा सकती है
मशीन में ब्लूटूथ डिवाइस लगाया जा सकता है
मशीन का मदरबोर्ड बदला जा सकता है
 वगैरह

चुनाव आयोग का कहना है कि मशीन कड़ी निगरानी में रहती है इसलिए किसी के हाथ में जाने की संभावना शून्य है

लेकिन आपको जानकर ताज्जुब होगा कि मीडिया में खबर आ चुकी है कि वोटिंग मशीन मैं सिर्फ अधिकारियों के घरों से मिली है बल्कि कबाड़खाना में भी यह मशीन पाई गई है

चुनाव खत्म होने के बाद 45 दिन तक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को चुनाव आयोग संभालकर रखता है लेकिन इसके बाद इसको एक सीधे सादे वेयरहाउस में रखा जाता है जहां पर सामान्य सी सिक्योरिटी लगी हुई होती है

चुनाव आयोग का यह कहना कि ऐसी परिस्थितियों में वोटिंग मशीन कभी भी किसी के हाथ में नहीं जा सकती यह सरासर गलत है और खबरों से यह साबित हो चुका है


2 सॉफ्टवेयर टेंपरिंग

आपको यह जानकर ताज्जुब होगा की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में चल रहा सॉफ्टवेयर बनता तो भारत में है लेकिन उसे चिप में लिखने की टेक्नोलॉजी भारत में नहीं है और इसलिए यह सॉफ्टवेयर विदेशी कंपनी को दिया जाता है जो अपनी चिप में इसको लगा कर वह चिप वापस भारत भेजती है

विदेशी कंपनी ने हमारा दिया हुआ सॉफ्टवेयर ही अंदर डाला है यह जानने की कोई विधि भारतीय चुनाव आयोग या ईवीएम बना रही कंपनियों के पास नहीं है

मतलब साफ है कि अगर कोई विदेशी कंपनी में ही सॉफ्टवेयर से धांधली करता है तो उसको हम यहां पर नहीं जान सकते क्योंकि चिपको हम रीड नहीं कर सकते

विदेशी कंपनी के लोग ईमानदार है ऐसा मानना खतरे से खाली नहीं है क्योंकि हम जानते हैं कि ऐसे लोगों को भी भ्रष्टाचार से खरीदा जा सकता है

अगर सारे विदेशी ईमानदार होते तो बोफोर्स कांड पनामा पेपर्स हेलीकॉप्टर खरीदी घोटाला जैसी घटनाएं होती ही नहीं

पुराने जमाने में बैलेट पेपर को अगर रिगिंग करना होता था तो कई गुंडो को इस काम पर लगाना पड़ता था लेकिन नए जमाने में अगर कोई चिप पर अपना सॉफ्टवेयर लिखवा लेता है तो सिर्फ एक आदमी ही इस महा रिगिंग को अंजाम दे सकता है

➖➖➖➖➖➖➖➖
अगर बेलट रिगिंग लोकशाही
पर रेप है तो इलेक्ट्रॉनिक
वोटिंग मशीन के सॉफ्टवेयर
 की रिगिंग  गैंगरेप है
➖➖➖➖➖➖➖➖

क्या हो सकता है उपाय?

चुनाव अधिकारी चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के सामने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को चेक करवाता है

अभी इस प्रक्रिया में सिर्फ बटन दबाकर वोटिंग ही देखी जाती है इसमें ना तो सॉफ्टवेयर की जनुइनिटी परखने का कोई प्रावधान है न ही तो हार्डवेयर की जनुइनिटी परखने का कोई प्रावधान है

असल में कोई भी सॉफ्टवेयर जेन्युइन है या नहीं इसके लिए उस सॉफ्टवेयर के साथ एक खास कोड आता है जिससे सॉफ्टवेयर इंजीनियर को यह मालूम पड़ता है कि वह सॉफ्टवेयर सही है या नहीं है

उस सॉफ्टवेयर के कोड से उसकी प्रामाणिकता जांच की जा सकती है

इसी तरह से मशीन का हार्डवेयर जेन्युइन है या नहीं इसका चेकिंग भी चुनाव से पहले होना चाहिए

इस चेकिंग में मदर बोर्ड डिस्प्ले मेमोरी चिप सब बिना टेमपर किए हुए है इसकी जांच होनी चाहिए

मशीन की जांच के बाद जब वोटिंग शुरू हो तो ईवीएम के साथ पर्ची VVPAT प्रिंट करने वाली मशीन भी लगी होनी चाहिए

काउंटिंग के वक्त कम से कम 25 परसेंट पर्चियों का अपनी मूल वोटिंग के साथ मिलान करना चाहिए

अगर यह मिलान सही मिलता है तो चुनाव नतीजे घोषित करने चाहिए और अगर यह मिलान नहीं होता है तो चुनाव रद्द होकर फिर से करवाने चाहिए

〰〰〰〰〰〰〰〰

दोस्तों इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की गड़बड़ी किसी एक पार्टी विशेष के लिए की जा सकती है आज जो लोग सत्ता में है वही लोग ऐसी गड़बड़ी की वजह से सत्ता से बाहर हो सकते हैं

भारतीय लोकतंत्र के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन एक बहुत बड़ा खतरा है इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में भारतीय प्रजा का विश्वास बनाए रखने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है