Thursday, October 27, 2016

कच्छ में अडानी पावर : अडानी को मुनाफा, पाकिस्तान को बिजली, मोदी सरकार को वाहवाही लेकिन पास के गांवों को बर्बादी

गुजरात में कच्छ के मांडवी तहसील में एक गांव है इसका नाम है लायजा। इस गांव के पास में अडानी की कंपनी कोयले से बिजली बनाएगी। इसके लिए अरबों का काम चालू हो चुका है और सरकार से जो भी परमिशन लेनी पड़े वह सब से ली गई है लेकिन सोचने वाली बात यह है कि क्या सरकार ने सब कुछ सोचकर यह परमिशन दी है ? या यह कंपनी अडानी की है इसलिए उनको ऐसे परमिशन से मिली है?

गौरतलब है कि अडानी यहां पर जो कोयले से बिजली बना रहा है उसके लिए कोयला ऑस्ट्रेलिया से आएगा। यह कोयला लायजा के पास में जो समुद्र किनारा है वही पर उसकी प्राइवेट जेटी पर उतरेगा । वहां से कनवेयर बेल्ट से वह सीधा सीधा पावर जनरेशन कंपनी में पहुंचेगा।

 यहाँ जो पावर बनेगा उसकी कच्छ को या गुजरात को कोई जरूरत नहीं है इसलिए यह पावर बाहर बेचा जाएगा और शायद इसका प्रथम ग्राहक पाकिस्तान होगा।

 सोचने वाली बात यह है कि अडानी को पाकिस्तान के साथ बिजली का धंधा करवाने के लिए कच्छ की जमीन को दी गई है ।

जब यह फैक्ट्री चलेगी उसमें से कोयला जलेगा तो उसका धुंआ बहुत बड़ी चिमनी से बाहर जाएगा। पर्यावरण के विशेषज्ञ बोलते हैं कि इस धुए में राख भी होगी और बहुत छोटे कण भी होंगे। इससे आसपास के 30 किलोमीटर के विस्तार में इस धुए का असर पड़ेगा।
ये जो लाएजा गांव है वह अपनी खेती बाड़ी के लिए जाना जाता है। यह पूरा विस्तार कच्छ में ऐसा है कि यहां पर अच्छी खेती बाड़ी हो रही है। जब कोयले की राख नीचे बैठेगी तब वह 30 किलोमीटर तक के पेड़ पौधों पर चिपक जाएगी और इस वजह से पेड़ पौधे प्रकाश संश्लेषण नहीं कर पाएंगे  और मर जाएंगे।

यह सब होने से आसपास के लोगो का जन जीवन बर्बाद हो सकता है । जब भी ऐसा बड़ा प्रोजेक्ट लगता है तो सरकार और कंपनी के लोग यह बोलते हैं कि इतना बड़ा प्रोजेक्ट है तो आसपास के लोगों को रोजगार मिलेगा लेकिन इस प्रोजेक्ट में ऐसा कुछ नहीं है जिससे आसपास के लोगों को ज्यादा रोजगार मिल सके । जहां पर कोयला उतरने वाला है वह समुद्र किनारे से कंपनी का अंतर सिर्फ 4 से 5 किलोमीटर है तो समुद्र से कोयला कंपनी तक लाने के लिए किसी प्रकार के वाहन की जरूरत नहीं है यह काम कनवेयर बेल्ट ही कर देगा! मतलब किसी को रोजगारी नहीं !
प्लांट चलाने के लिए जो लोग चाहिए वह ऑटोमेशन के जमाने में बहुत कम ही रह जाते हैं और ऐसे काम में आस-पास के गांव वाले कम ही सेवा दे सकते हैं इसके लिए इंजीनियर और एक्सपर्ट्स ज्यादा चाहिए

 इसका मतलब यह हुआ कि पैसा अदानी का कंपनी उसकी कनवेयर बेल्ट उसका और आस-पास के गांव के लिए सिर्फ प्रदूषण!

 धंधे का मुनाफा अडानी का
 बिजली का फायदा पाकिस्तान का
आसपास के लोगों को मिला तो बस बेबसी का हाल !
इसके लिए यहां के लोगों ने विरोध किया है लेकिन इतनी बड़ी कंपनी के पास कुछ एक छोटे से गांव का क्या मॉल?

और इससे भी ताज्जुब की बात यह है कि यह पावर प्रोजेक्ट सिर्फ अकेला नहीं है इसके उपरांत इसी पावर प्रोजेक्ट के पास में एक गैस आधारित विद्युत मथक अभी बन रहा है।
 विशेषज्ञों का मानना है कि यहां पर अगर गैस के साथ ठीक से काम नहीं हो सका तो कच्छ में दूसरा भोपाल बन सकता है और यहां पर भी जान माल का काफी नुकसान हो सकता है ।

यह जो फैक्ट्रियां काम करेगी उनसे जो कचरा निकलेगा वह सीधा कच्छ के समुद्र में फेंका जाएगा ।
आपको मालूम होगा कि यहां पर खास प्रकार के कछुए अंडे देने आते हैं जिसकी की उम्र 700 800 साल होती है। अगर ऐसी फैक्ट्रियां अपनी गंदगी और गर्मी समुद्र में छोड़ती है तो यहां की आबोहवा उन कछुओं के लिए जानलेवा हो सकती है।

 कछुए की यह खास जाति विलुप्ति के कगार पर है और उसे आख़िरी धक्का शायद ऐसी कंपनिया लगा दे !

अब देखना यह है कि क्या भारत सरकार इन सभी पहलुओं पर फिर से विचार करेगी या लोगों को पर्यावरण को और कछुए जैसे आरक्षित प्राणी को अदानी के भरोसे छोड़ देगी?
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Thursday, October 20, 2016

आम आदमी पार्टी : बिज़नेस फ्रेंडली या बिज़नेस विरोधी?

उद्योगपति व्यापारी और आम आदमी पार्टी : क्या आप की नीतिया उद्योग और व्यापार के विरोधी है?

23 तारीख को केजरीवाल आम आदमी पार्टी का व्यापारियों का मेनिफेस्टो पंजाब में जारी करने जा रहे हैं। इस वक्त यह सवाल उठाना लाजमी है कि क्या आम आदमी पार्टी की नीतियां व्यापारियों और उद्योगपतिओके विरुद्ध है?
यह बात जानने के लिए हमें आम आदमी पार्टी करनी क्या है यही देखना होगा
क्या आज तक आपने कभी  सुना है कि किसी राजनीतिक पार्टी ने अपना मेनीफेस्टो व्यापारियों से पूछकर बनाया है ? सामान्यत यह होता है कि कोई बड़े-बड़े लोग एक कमरे में बैठकर उनको जो अच्छा लगे वैसा मेनीफेस्टो बंद कमरे में तैयार कर देते हैं
आम आदमी पार्टी अकेली ऐसी पार्टी है जो व्यापारीओ को पुछ कर अपना मेनिफेस्टो बना रही है । दिल्ली में भी चुनाव के वक्त मेनीफेस्टो लोगों को पूछ कर बनाया गया था । व्यापारियों के बारे में जो मेनीफेस्टो था व्यापारीओ पूछकर बनाया गया था और यही बात पंजाब में की जा रही है । पंजाब के व्यापारियों को पूछकर आम आदमी पार्टी ने पंजाब का व्यापार मेनीफेस्टो बनाया है । यही मेनीफेस्टो 23 तारीख को केजरीवाल जारी करने जा रहे हैं।
इसका मतलब यह होगा कि जो अपेक्षा है उद्योगपति और व्यापारियों को आम आदमी पार्टी से, वह अपेक्षाएं इस मेनिफेस्टो में रखी गई है. गौरतलब है कि चाहे आम आदमी पार्टी के दिल्ली के काम में कितने ही अड़ंगे लगाए जाए लेकिन यह उस ने दिखा दिया है कि अपना मेनीफेस्टो वह किस कदर लागू करने को मेहनत कहती है

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि आम आदमी पार्टी की सरकार जब दिल्ली में बन गई उसके बाद उन्होंने व्यापारियों और उद्योगपतियों के लिए क्या किया
सबसे पहले तो उन्होंने इंस्पेक्टर और रेड राज खत्म किया उन्होंने वेट की रेड पर पाबंदी लगा दी और सिर्फ इतनी हैं रेड की जो जरुरी थी । इससे छोटे व्यापारियों को अपने कामकाज में काफी राहत मिली

इसके उपरांत केजरीवाल सरकार ने व्यापारियों के वेट का सरलीकरण किया इतना ही नहीं काफी चीजों पर वेट कम किया जिससे कि दिल्ली में व्यापार बढ़ाया जा सके।

व्यापारियों उद्योगपतियों के साथ बैठकर सरकार ने अपने अधिकारियों से मिलकर काफी सारे फॉर्म्स में भी तब्दीली की । कुछेक बड़े-बड़े फॉर्म्स तो पूरे के पूरे कैंसिल हो गए इससे इज ऑफ डूइंग बिजनेस में काफी इजाफा हुआ ।

लेकिन इन सब में जो सबसे बड़ी बात आती है वह यह है कि आम आदमी पार्टी की सरकार कोई बहरी सरकार नहीं है । वह व्यापारियों और उद्योगपतियों के साथ संवाद में रहती है । इस बात का प्रमाण यह है कि जब आम आदमी पार्टी की सरकार का बजट आया तब उन्होंने कुछेक चीजों पर वेट में  बढ़ोतरी की । व्यापारी इन  से सहमत नहीं थे और उन्होंने तुरंत अपना पक्ष जाकर मुख्यमंत्री के पास रखा मुख्यमंत्री ने उनकी बात सुनी और उन्हें भी उनकी बात सही लगी।

कोई दूसरी पार्टी की सरकार होती तो यह बोलती कि आपकी बात सही है लेकिन हम अगले साल इस पर गौर करेंगे । लेकिन केजरीवाल सरकार इतनी बिजनेस फ्रेंडली है कि उसने अपनी वेट की बढ़ोतरी व्यापारियों की बात सुनने के 24 घंटे के अंदर अंदर वापस ले ली ! शायद ऐसा आजाद भारत के इतिहास में पहली बार हुआ होगा

अगर आप एक व्यापारी या उद्योगपति हैं तो आप ही सोचिए कि ऐसी पार्टी कहां मिलेगी जो
आपको पूछ कर अपना मेनिफेस्टो बनाए, आपको पूछ कर अपने कायदे कानून बनाए, आपको पूछ कर अपना वेट कानून संशोधन करें, आपको पूछ कर इंस्पेक्टर राज का खात्मा करें, आपको पूछ कर रेड राज बंद करें,  आपको पूछ कर लंबे चौड़े फॉर्म्स कैंसिल कर दे, आपको पूछ कर अपना बजट बनाए और आपको ही पूछ कर तुरंत अगर उस में कुछ कमी रह गई है तो बदलाव करे !!

 यह काम सिर्फ और सिर्फ आम आदमी पार्टी ही कर सकती है इसलिए आम आदमी पार्टी की नीतियां और उसका कामकाज यह स्पष्ट दिखाते हैं कि आम आदमी पार्टी जैसी बिजनेस फ्रेंडली पार्टी दूसरी कोई नहीं है।

हमने यहां पर जो बातें लिखी वह कोई कही सुनाई बात नहीं है । इस बातों को अगर आप भी डिटेल में पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करके जरूर पढ़ सकते हैं

http://m.hindustantimes.com/delhi/live-delhi-budget-to-be-tabled-today-aap-may-cut-vat/story-Ajdhs1AubWkdFJcQbp4c4N.html

http://indianexpress.com/article/cities/delhi/after-protests-by-traders-aap-govt-to-roll-back-vat-on-low-cost-footwear-textiles/

http://www.dnaindia.com/india/report-unnecessary-raids-on-traders-to-stop-delhi-cm-arvind-kejriwal-2063879
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Wednesday, October 12, 2016

विदेशी काला धन , यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन अगेंस्ट करप्शन, भाजपा कांग्रेस और राम जेठमलानी और वह प्रेसिडेंट जो काले धन वालो को बचाना चाहता है

काले धन पर राम जेठमलानी का राज्यसभा में बड़ा खुलासा

2 सितंबर को भारत की राज्यसभा में जो वक्तव्य राम जेठमलानी ने दिया वह काले धन के बारे में आँखे खोल देने वाला था। राम जेठमलानी भाजपा से निष्कासित हो चुके हैं इसलिए उन्होंने अदर्स की केटेगरी में खुद को शामिल करवाके अपनी बात रखी

 जेठमलानी बोलने के लिए कम से कम 20 मिनिट चाहते थे लेकिन अध्यक्ष ने  नियमों के आधीन मुश्किल से 10 मिनिट बोलने दिया । इस 10 मिनिट में उन्होंने जो बात की वह हम सब के लिए आंखें खोल देने वाली है ।

 2004 में यूनाइटेड नेशंस में काले धन को रोकने के लिए एक समझौता हुआ । यूनाइटेड नेशन कन्वेंशन अगेंस्ट करप्शन का मकसद यह था कि जिस कानूनों के तहत अलग-अलग देशों में कालेधन को पनाह मिल रही थी उन को समाप्त करके वह काला धन उजागर किया जाए । उस समझौते के तहत भारत में भी हस्ताक्षर किए।

भारत के राजनेताओं ने पिछले चुनाव में काले धन को बहुत बड़ा मुद्दा बनाया लेकिन अगर विश्व में किस देश ने काले धन पर अच्छा काम किया है तो वह है जर्मनी।
जर्मनी ने अपने खास तरीके से स्विस बैंक में से उन लोगों के नाम निकाले जिन्होंने वहां पर बेशुमार काला धन इकट्ठा करके रखा है । इस काम के लिए जर्मनी ने एक बैंक अधिकारी को बहुत बड़ी घूस खिला कर उससे यह नाम उगलवाये। ऐसे 1400 लोगों के नाम जर्मनी के पास आए। 

जर्मनी ने विश्व से बोला कि अगर किसी भी देश की सरकार को यह नाम चाहिए तो वह यह नाम दे सकती है लेकिन उस वक्त कांग्रेस की सरकार ने यह लाने में कोई दिलचस्पी नहीं जताई । तभी राम जेठमलानी खुद जर्मनी गये और उन्होंने वहां पर सरकार से निवेदन किया कि भारत में लोकशाही है और लोकशाही में विपक्ष की एक बड़ी भूमिका रहती है यह नाम भले ही सत्ता पक्ष ने न मांगे हो लेकिन भारत का विपक्ष यह नाम जरुर चाहता है।

 इसके जवाब में जेठमलानी को जर्मनी की सरकार ने बोला कि अगर भारत का विपक्ष यह चाहता है तो हम जरुर देंगे बशर्ते आप वहां से लिखवा कर आइए कि उन्हें यह नाम चाहिए। 

गौरतलब है जर्मनी के पास जो काले धन रखने वालों की सूची आई उसमें से ज्यादातर नाम भारतीय लोगों के थे। सोशल मीडिया पर और whatsapp पर आपको काले धन के मालिक लोगों के नाम की लिस्ट तो मिली होगी भले ही वह लिस्ट एक नकली लिस्ट थी लेकिन सारा देश जानता है कि बड़े बड़े राजनेता और उद्योगपतियों का ऐसे लिस्ट में नाम हो सकता है।

जब जेठमलानी भाजपा से पत्र लिखवाने के लिए गए तब उनकी किसी ने नहीं सुनी और उन्हें ऐसा कोई पत्र नहीं दिया गया जबकि उनके पास इस बात के सबूत थे कि जर्मन सरकार उन्हें वह नाम देने की बात मान चुकी है। जेठमलानी ने यह बात बहुत अफसोस से राज्यसभा में कही कि उनका दो लाइन का पत्र विपक्षी दल के नाते भाजपा के नेताओं ने साइन नहीं किया और उन्हें जर्मनी से भारतीय कालाधन रखने वाले ठगों के नाम लाने से रोका गया !

जेठमलानी के भाषण में नाटकीय मोड़ तब आया जब उन्होंने कहा कि जब विपक्ष ने उसकी कोई मदद नहीं की तो उन्होंने कोर्ट में जाने का मन बनाया लेकिन उस काम में अड़चन डालने के लिए भाजपा के इस वक्त के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने एड़ी चोटी का जोर लगाया ! जब उन्होंने ऐसा कहा तो पूरी राज्यसभा में हंगामा हो गया। स्पीकर ने उन्हें नियमों के आधीन आगे बोलने से रोक दिया और चर्चा वहीं समाप्त हो गई !

यहां पर हमने उस वीडियो की लिंक दी है और आप खुद वह वीडियो देख सकते हैं 

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत में कोई विपक्ष का अस्तित्व है या नहीं ? अगर पक्ष और विपक्ष दोनों काले धन रखने वाले लोगों को बचाने में इस कदर लगे हुए हैं तो देश में कभी काला धन आ ही नहीं सकता यह बात स्वयं स्पष्ट है
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Sunday, October 9, 2016

क्या 2019 में केजरीवाल मोदी के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं?

मोदी के भारत विजय के बाद जो हवा चल रही थी कि मोदी और शाह अजेय है उसको खत्म करने वाला अगर कोई शख़्स था तो वह था अरविंद केजरीवाल ! एक नई नवेली पार्टी ने राजनीति के सारे गुर सीख चुकि बीजेपी को दिल्ली में धूल चटा दी और कांग्रेस का नामोनिशान भी मिटा दिया

लेकिन क्या यही पार्टी 2019 के लोकसभा चुनावों में कुछ कर सकती है ? हम यहां पर राज्यों के चुनाव की बात नहीं कर रहे पंजाब और गोवा में आम आदमी पार्टी अच्छा करने जा रही है यह बात कई विश्वसनीय सर्वे में साबित हो चुका है गुजरात में भी आम आदमी पार्टी के पर निकल चुके हैं

अगर 2019 में अरविंद केजरीवाल को चुनौती खड़ी करनी है तो सबसे बड़ी बात यह होगी कि उन्हें बीजेपी और कांग्रेस को अपनी राजनीति के अखाड़े में उतरना होगा

मतलब यह है कि अगर केजरीवाल स्वास्थ्य शिक्षा बिजली पानी के मुद्दों पर राजनीति करते हैं और उन्हीं मुद्दों पर अगर चुनाव लड़ते हैं तो ही उनकी जीत होने की संभावना है। अगर केजरीवाल इन मुद्दों से भटक कर पाकिस्तान, हिंदू मुस्लिम, जातिवाद और धर्मवाद के मुद्दों पर उतर गए तो इन मुद्दों पर बीजेपी और कांग्रेस को हराना नामुमकिन हो जाएगा क्योंकि इतने सालों से इन्हीं मुद्दों पर बीजेपी और कांग्रेस वाले चुनाव जीत रहे हैं और ऐसी बातों पर लोगों को झूठ फैलाकर जनता को उकसाना यह उनका बहुत पुराना हुनर है।

अभी-अभी जब केजरीवाल ने पाकिस्तान को सबक सिखाने की बात कही तभी यह बात खुलकर सामने आ गई कि अगर केजरीवाल पाकिस्तान की बात करेंगे तो बीजेपी उनका बयान ट्विस्ट करके उन्हें देश की जनता के सामने आसानी से देशद्रोही साबित कर सकती है। इसके लिए बीजेपी ने अपने पाले हुए मेरे हाउसों का भरपूर प्रयोग किया साथ-साथ अपनी पैसों से पलते हुए सोशल मीडिया में अपना हुनर दिखाने वाले भक्तो का भी बहुत प्रयोग किया !

दूसरी और अगर केजरीवाल गुड गवर्नेंस की बात करें तो बीजेपी और कांग्रेस बैकफुट पर नजर आते हैं! अच्छी स्वास्थ्य सेवा, अच्छी शिक्षा, सरकारी स्कूल में अच्छा कामं, किसानों को भरपूर मुआवजा, मजदूरों को अच्छी मजदूरी अगर यह सब बातें केजरीवाल उठाते हैं तो उनका जवाब देना बीजेपी और कांग्रेस के लिए बहुत ही मुश्किल हो जाता है ।

इसलिए 2019 में अगर केजरीवाल को एक चैलेंज पेश करना है तो उन्हें अपने ही अखाड़े में कांग्रेस और बीजेपी को उतार कर हराना होगा ना कि उनके जातिवाद धर्मवाद और फर्जी राष्ट्रवाद के अखाड़े में उतरकर लड़कर वह सफल हो सकते हैं।

कौन होगा गुजरात में आप का मुख्यमंत्री उम्मीदवार?

क्या कनुभाई कलसरिया बन सकते हैं आम आदमी पार्टी गुजरात के सीएम कैंडिडेट?

जैसे जैसे गुजरात के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे वैसे गुजरात में राजकीय माहौल गर्मा रहा है सालों से गुजरात में सिर्फ दो ही पार्टी का प्रभुत्व रहा है कांग्रेस और bjp लेकिन इस बार इस समीकरण में आम आदमी पार्टी जुड़ गई है

भले ही गुजरात बीजेपी और कांग्रेस आम आदमी पार्टी को नोन सिरियस बताते हो लेकिन ऑफ़ द रिकॉर्ड वह भी कबूल करते हैं कि गुजरात की राजनीति में एक तीसरा परिमाण उभर कर आ चुका है

ऐसे में आम आदमी पार्टी को अपने मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के रूप में एक ऐसा चेहरा चाहिए जोकि ईमानदार हो पढ़ा लिखा हो गुजरात की राजनीति की गहरी समझ रखता हो गुजरात के किसानों और मजदूरों का हमदर्द हो और गुजरात की राजनीति में उसने सालों गुजारे हो

अगर यह सब बातें देखें तो सिर्फ एक ही चेहरा ऐसा है जो आम आदमी पार्टी में सामने ऊपर के आता है वह है पेशे से जनरल सर्जन डॉक्टर कनुभाई कलसरिया

पहले bjp की तरफ से विधायक रह चुके कनुभाई कलसरिया की विशेषता यह है कि उन्होंने कभी भी हाईकमान के आगे अपना माथा नहीं टेका। जब भी लोगों को कनुभाई की जरूरत हुई तब उन्होंने bjp और पार्टी लाइन को तोड़ कर लोगों की मदद की चाहे मसला निरमा को जमीन देने का हो या माछीमारो के हकों का

कनुभाई वह एक मिलनसार और विनम्र व्यक्ति है गुजरात के लोगों ने बीजेपी के नेताओं की तुमाखी देखी है और वह अभी भी देख रहे हैं । ऐसी दादागिरी का अगर कोई विनम्र जवाब है तो वह है डॉक्टर कनुभाई कलसरिया।

कनुभाई कलसरिया न सिर्फ एक राजकीय नेता है बल्कि एक डॉक्टर की हैसियत से वह जो हॉस्पिटल चलाते हैं वहां पर गरीबों की भरपूर सेवा होती है जो ऑपरेशन के प्राइवेट अस्पताल में 20 से 30000 लगते हैं वही ऑपरेशन उससे बहुत कम दामों में कनु भाई के अस्पताल में हो जाते हैं।
गुजरात के आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता हैं उनमें भी कनुभाई कलसरिया का नाम एक आवाज से ऊपर लिया जाता है।

जब तक पार्टी की केंद्रीय नेता गिरी का सवाल है अब तक का अगर रिकॉर्ड देखें तो कनुभाई कलसरिया पार्टी की हर एक मुश्किल में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ रहे हैं चाहे वह मामला लोकसभा हारने का हो या पार्टी की अंदरुनी कलह का हो कनु भाई हमेशा अरविंद केजरीवाल के साथ खड़े हुए नजर आए

कनु भाई ने खुद ने भी पार्टी की दिल्ली इकाई की मदद करने में कोई कसर नहीं रखी है खुद सर्जन होने के बावजूद जितना हो सके उतना ज्यादा दिल्ली जाकर पार्टी के कामों से जुड़े रहे हैं और सामने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अपनी कनु भाई की उपस्थिति को पूरी तवज्जो दी है चाहे वह पार्टी की जनरल मीटिंग हो या कोई खास मीटिंग कनु भाई को हमेशा उसमें आमंत्रित किया गया है

 ऐसे में अगर कोई आम आदमी पार्टी गुजरात के सामान्य कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री उम्मीदवार के बारे में पूछेगा तो उसके मुंह पर तो सिर्फ एक ही नाम आता है वह है कनुभाई कलसरिया

लेकिन फिर भी आम आदमी पार्टी अपने निर्णय उसे विवाद में रखा करते  है
क्या यह हो सकता है कि दलित आंदोलन या पटेल आंदोलन के कोई बड़े नेता गुजरात आम आदमी पार्टी से जुड़े और फिर उनमें से किसी को सीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया जाए? इस वक्त तो दलित आंदोलन और पटेल आंदोलन के बड़े नेता आम आदमी पार्टी से खुद को किनारे पर रखे हुए हैं फिर भी पटेल आंदोलन और दलित आंदोलन के नेताओं ने कभी आम आदमी पार्टी से समूचा पल्ला नहीं झाड़ा है।

असली चेहरा तो वक्त आने पर मालूम पड़ेगा लेकिन अगर डॉक्टर कनुभाई कलसरिया गुजरात आम आदमी पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बनते हैं तो यह गुजरात की प्रजा के लिए एक नई तरह की राजनीति की उत्कृष्ट शुरुआत हो सकती है !