Sunday, October 9, 2016

कौन होगा गुजरात में आप का मुख्यमंत्री उम्मीदवार?

क्या कनुभाई कलसरिया बन सकते हैं आम आदमी पार्टी गुजरात के सीएम कैंडिडेट?

जैसे जैसे गुजरात के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे वैसे गुजरात में राजकीय माहौल गर्मा रहा है सालों से गुजरात में सिर्फ दो ही पार्टी का प्रभुत्व रहा है कांग्रेस और bjp लेकिन इस बार इस समीकरण में आम आदमी पार्टी जुड़ गई है

भले ही गुजरात बीजेपी और कांग्रेस आम आदमी पार्टी को नोन सिरियस बताते हो लेकिन ऑफ़ द रिकॉर्ड वह भी कबूल करते हैं कि गुजरात की राजनीति में एक तीसरा परिमाण उभर कर आ चुका है

ऐसे में आम आदमी पार्टी को अपने मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के रूप में एक ऐसा चेहरा चाहिए जोकि ईमानदार हो पढ़ा लिखा हो गुजरात की राजनीति की गहरी समझ रखता हो गुजरात के किसानों और मजदूरों का हमदर्द हो और गुजरात की राजनीति में उसने सालों गुजारे हो

अगर यह सब बातें देखें तो सिर्फ एक ही चेहरा ऐसा है जो आम आदमी पार्टी में सामने ऊपर के आता है वह है पेशे से जनरल सर्जन डॉक्टर कनुभाई कलसरिया

पहले bjp की तरफ से विधायक रह चुके कनुभाई कलसरिया की विशेषता यह है कि उन्होंने कभी भी हाईकमान के आगे अपना माथा नहीं टेका। जब भी लोगों को कनुभाई की जरूरत हुई तब उन्होंने bjp और पार्टी लाइन को तोड़ कर लोगों की मदद की चाहे मसला निरमा को जमीन देने का हो या माछीमारो के हकों का

कनुभाई वह एक मिलनसार और विनम्र व्यक्ति है गुजरात के लोगों ने बीजेपी के नेताओं की तुमाखी देखी है और वह अभी भी देख रहे हैं । ऐसी दादागिरी का अगर कोई विनम्र जवाब है तो वह है डॉक्टर कनुभाई कलसरिया।

कनुभाई कलसरिया न सिर्फ एक राजकीय नेता है बल्कि एक डॉक्टर की हैसियत से वह जो हॉस्पिटल चलाते हैं वहां पर गरीबों की भरपूर सेवा होती है जो ऑपरेशन के प्राइवेट अस्पताल में 20 से 30000 लगते हैं वही ऑपरेशन उससे बहुत कम दामों में कनु भाई के अस्पताल में हो जाते हैं।
गुजरात के आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता हैं उनमें भी कनुभाई कलसरिया का नाम एक आवाज से ऊपर लिया जाता है।

जब तक पार्टी की केंद्रीय नेता गिरी का सवाल है अब तक का अगर रिकॉर्ड देखें तो कनुभाई कलसरिया पार्टी की हर एक मुश्किल में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ रहे हैं चाहे वह मामला लोकसभा हारने का हो या पार्टी की अंदरुनी कलह का हो कनु भाई हमेशा अरविंद केजरीवाल के साथ खड़े हुए नजर आए

कनु भाई ने खुद ने भी पार्टी की दिल्ली इकाई की मदद करने में कोई कसर नहीं रखी है खुद सर्जन होने के बावजूद जितना हो सके उतना ज्यादा दिल्ली जाकर पार्टी के कामों से जुड़े रहे हैं और सामने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अपनी कनु भाई की उपस्थिति को पूरी तवज्जो दी है चाहे वह पार्टी की जनरल मीटिंग हो या कोई खास मीटिंग कनु भाई को हमेशा उसमें आमंत्रित किया गया है

 ऐसे में अगर कोई आम आदमी पार्टी गुजरात के सामान्य कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री उम्मीदवार के बारे में पूछेगा तो उसके मुंह पर तो सिर्फ एक ही नाम आता है वह है कनुभाई कलसरिया

लेकिन फिर भी आम आदमी पार्टी अपने निर्णय उसे विवाद में रखा करते  है
क्या यह हो सकता है कि दलित आंदोलन या पटेल आंदोलन के कोई बड़े नेता गुजरात आम आदमी पार्टी से जुड़े और फिर उनमें से किसी को सीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया जाए? इस वक्त तो दलित आंदोलन और पटेल आंदोलन के बड़े नेता आम आदमी पार्टी से खुद को किनारे पर रखे हुए हैं फिर भी पटेल आंदोलन और दलित आंदोलन के नेताओं ने कभी आम आदमी पार्टी से समूचा पल्ला नहीं झाड़ा है।

असली चेहरा तो वक्त आने पर मालूम पड़ेगा लेकिन अगर डॉक्टर कनुभाई कलसरिया गुजरात आम आदमी पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बनते हैं तो यह गुजरात की प्रजा के लिए एक नई तरह की राजनीति की उत्कृष्ट शुरुआत हो सकती है !

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