Wednesday, October 12, 2016

विदेशी काला धन , यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन अगेंस्ट करप्शन, भाजपा कांग्रेस और राम जेठमलानी और वह प्रेसिडेंट जो काले धन वालो को बचाना चाहता है

काले धन पर राम जेठमलानी का राज्यसभा में बड़ा खुलासा

2 सितंबर को भारत की राज्यसभा में जो वक्तव्य राम जेठमलानी ने दिया वह काले धन के बारे में आँखे खोल देने वाला था। राम जेठमलानी भाजपा से निष्कासित हो चुके हैं इसलिए उन्होंने अदर्स की केटेगरी में खुद को शामिल करवाके अपनी बात रखी

 जेठमलानी बोलने के लिए कम से कम 20 मिनिट चाहते थे लेकिन अध्यक्ष ने  नियमों के आधीन मुश्किल से 10 मिनिट बोलने दिया । इस 10 मिनिट में उन्होंने जो बात की वह हम सब के लिए आंखें खोल देने वाली है ।

 2004 में यूनाइटेड नेशंस में काले धन को रोकने के लिए एक समझौता हुआ । यूनाइटेड नेशन कन्वेंशन अगेंस्ट करप्शन का मकसद यह था कि जिस कानूनों के तहत अलग-अलग देशों में कालेधन को पनाह मिल रही थी उन को समाप्त करके वह काला धन उजागर किया जाए । उस समझौते के तहत भारत में भी हस्ताक्षर किए।

भारत के राजनेताओं ने पिछले चुनाव में काले धन को बहुत बड़ा मुद्दा बनाया लेकिन अगर विश्व में किस देश ने काले धन पर अच्छा काम किया है तो वह है जर्मनी।
जर्मनी ने अपने खास तरीके से स्विस बैंक में से उन लोगों के नाम निकाले जिन्होंने वहां पर बेशुमार काला धन इकट्ठा करके रखा है । इस काम के लिए जर्मनी ने एक बैंक अधिकारी को बहुत बड़ी घूस खिला कर उससे यह नाम उगलवाये। ऐसे 1400 लोगों के नाम जर्मनी के पास आए। 

जर्मनी ने विश्व से बोला कि अगर किसी भी देश की सरकार को यह नाम चाहिए तो वह यह नाम दे सकती है लेकिन उस वक्त कांग्रेस की सरकार ने यह लाने में कोई दिलचस्पी नहीं जताई । तभी राम जेठमलानी खुद जर्मनी गये और उन्होंने वहां पर सरकार से निवेदन किया कि भारत में लोकशाही है और लोकशाही में विपक्ष की एक बड़ी भूमिका रहती है यह नाम भले ही सत्ता पक्ष ने न मांगे हो लेकिन भारत का विपक्ष यह नाम जरुर चाहता है।

 इसके जवाब में जेठमलानी को जर्मनी की सरकार ने बोला कि अगर भारत का विपक्ष यह चाहता है तो हम जरुर देंगे बशर्ते आप वहां से लिखवा कर आइए कि उन्हें यह नाम चाहिए। 

गौरतलब है जर्मनी के पास जो काले धन रखने वालों की सूची आई उसमें से ज्यादातर नाम भारतीय लोगों के थे। सोशल मीडिया पर और whatsapp पर आपको काले धन के मालिक लोगों के नाम की लिस्ट तो मिली होगी भले ही वह लिस्ट एक नकली लिस्ट थी लेकिन सारा देश जानता है कि बड़े बड़े राजनेता और उद्योगपतियों का ऐसे लिस्ट में नाम हो सकता है।

जब जेठमलानी भाजपा से पत्र लिखवाने के लिए गए तब उनकी किसी ने नहीं सुनी और उन्हें ऐसा कोई पत्र नहीं दिया गया जबकि उनके पास इस बात के सबूत थे कि जर्मन सरकार उन्हें वह नाम देने की बात मान चुकी है। जेठमलानी ने यह बात बहुत अफसोस से राज्यसभा में कही कि उनका दो लाइन का पत्र विपक्षी दल के नाते भाजपा के नेताओं ने साइन नहीं किया और उन्हें जर्मनी से भारतीय कालाधन रखने वाले ठगों के नाम लाने से रोका गया !

जेठमलानी के भाषण में नाटकीय मोड़ तब आया जब उन्होंने कहा कि जब विपक्ष ने उसकी कोई मदद नहीं की तो उन्होंने कोर्ट में जाने का मन बनाया लेकिन उस काम में अड़चन डालने के लिए भाजपा के इस वक्त के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने एड़ी चोटी का जोर लगाया ! जब उन्होंने ऐसा कहा तो पूरी राज्यसभा में हंगामा हो गया। स्पीकर ने उन्हें नियमों के आधीन आगे बोलने से रोक दिया और चर्चा वहीं समाप्त हो गई !

यहां पर हमने उस वीडियो की लिंक दी है और आप खुद वह वीडियो देख सकते हैं 

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत में कोई विपक्ष का अस्तित्व है या नहीं ? अगर पक्ष और विपक्ष दोनों काले धन रखने वाले लोगों को बचाने में इस कदर लगे हुए हैं तो देश में कभी काला धन आ ही नहीं सकता यह बात स्वयं स्पष्ट है
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